मिलने की खोजी राह प्रभु से हरे-हरे
मिलने की खोजी राह
प्रभु से हरे-हरे प्रभु से सुनि सजनी।
चाहे मथुरा काशी जाओ
चाहे बद्रीनाथ।
चाहे वृन्दावन गोकुल में
घूमो सबके साथ ।।
मिले नहीं ओम् धनी ।। मिलने १
करो जगत् में राज बनों
चाहे धन लुटाये कंगाल।
ओम् मिले नहीं ऐसे चाहे
ओढ़ लेउ मृगछाल ।।
सदा सोबहु धरनी ।। मिलने २
भूत मसानी पीपर पूजो
चाहे माता भुमियाँ।
तोहू ओम् मिलै नहीं चाहे
पूजो सैयद मीयां ।।
उमरि बीती अपनी ।। मिलने ३
दह भभूत रमा ऊपर
चाहे माथे तिलक लगाओ।
तबहु ओम् नाहीं चाहे
गंगा जमुना जाओ ।।
पड़े विपता सहनी ।। मिलने ४
वन-वन डोले मुख से
बोले तबहुँ ओम् न पावै।
प्यारी बहनो हृदय में ही
ध्यान करत मिल जावै ।।
करै जब शुभ करनी ।। मिलने ५










