जल्दी से जल्दी से उठो जरा (तर्ज-परदेशी-परदेशी जाना नहीं….)
जल्दी से जल्दी से उठो जरा
बिस्तर छोड़कर जाओ दौड़कर।
जीवन में ये बातें जरा अपनाके देखो
ऋषियों की वाणी कहीं भूल न जाना….।
कम से कम सौ साल जगत् में जीना है-
जीवन रूपी अमृत रस को पीना है।
‘रामरख’ करली साधन योग के सारे
आलस्य और सुस्ती को दूर भगाना।
सुबह-सुबह जो खुली हवा में फिरता है,
दण्ड-बैठक और तेल की मालिश करता है।
ठण्डे-ठण्डे पानी से मलकर के नहाओ-
बैठकर प्रभु का मन से ध्यान लगाना।










