गर्भ में बेटी को ना मिटाना।
तर्ज – सारी सृष्टि दुल्हन सी……
गर्भ में बेटी को ना मिटाना।
रोशनी कुछ तो इसको दिखाना ।।
बनके दुल्हन, ‘सचिन’ ये सजेगी
शहनाई भी घर में बजेगी होगा
वो पल भी कितना सुहाना
रोशनी कुछ तो………
तेरे आँगन में खेला करेगी
तेरे जीवन मे खुशियाँ भरेगी
पालने में इसे भी झुलाना रोशनी कुछ तो…..
अपने हाथों में लेकर खिलाना
दादा दादी से इसको मिलाना
खूब विद्या इसे भी पढ़ाना
रोशनी कुछ तो………
ये गरीबी भी घर की सहेगी
रूप देवी का बनकर रहेगी
दिल के अरमाँ ना इसके दबाना
रोशनी कुछ तो……….










