गणित ज्योतिष शिविर

0
28

।। ओ३म् ।।

गणित ज्योतिष शिविर

६ से १६ जून २०२४

(आचार्य रवीन्द्र जी हमीरपुर के सान्निध्य में)

सौजन्य-आर्ष न्यास

वानप्रस्थ साधक आश्रम, रोजड़, गुजरात

वेदांगों में सम्मिलित ज्योतिष शिविर का ज्ञान प्रत्येक पुरोहित व वैदिक धर्मी के लिए ही नहीं, प्रत्येक मानव के लिए, प्रत्येक जागरूक व्यक्ति के लिए, प्रत्येक विज्ञान प्रेमी के लिए आवश्यक है। जिस भूमि-संसार में हम रहते हैं, उसके दिन-रात, तिथि वार, पक्ष-मास, ऋतु-अयन, वर्ष-युग आदि कालों व उनके कारणों को समझना बहुत जिज्ञासा व रुचि का विषय है। पृथ्वी, चन्द्र, सूर्य, नक्षत्र आदि की गतियां व उसके अनुसार कालों की गणना प्राचीन काल से चली आ रही है। इसे ठीक से समझना, समझकर अपनाना हमारे लिए सुख-संतोष की अनुभूति देने वाला है। हमारे पर्व, महापुरुषों के जन्मदिन आदि भी निश्चित काल में होते हैं। प्राकृतिक घटनायें व काल का निर्धारण ये आपस में सम्बद्ध हैं, इसे जानना, समझना हमें विशेष दृष्टि व विवेक प्रदान करता है।

ज्योतिष एक विज्ञान है, युक्ति संगत गणित पर आधारित है। इसके साथ काल्पनिक फलित जुड़ चुका है। ज्योतिष के मुख्य ग्रन्थों का परिचय, उनकी प्रामाणिकता, ग्रन्थों में आये विभिन्न विषयों का परिज्ञान आचार्य रवीन्द्र जी करवायेंगे। इस शिविर में वास्तविक विज्ञान पर आधारित काल गणना को सीखने-समझने का अवसर मिलेगा।, वैदिक परंपरा में किये जाने वाले संकल्पपाठ को समझना भी महत्वपूर्ण है। रात्रि में आकाशीय तारों, नक्षत्रों, ग्रहों, राशियों को भी दिखाया जायेगा। सूर्योदय सूर्यास्त, चन्द्रोदय-चन्द्रास्त का अपने स्थान का मान निकालना भी सिखाया जायेगा।

आर्यजगत् के प्रसिद्ध विद्वान् आचार्य रवीन्द्र जी व साथ में आचार्या शीतल जी व मुनि सत्यजित् जी यह सब विस्तार से समझायेंगे। वे ज्योतिष सम्बन्धि शंकाओं-समस्याओं-जिज्ञासाओं का भी समाधान करेंगे। शिविर स्थल पर ८ जून शाम तक पहुँचना है। शिविर का समापन १६ जून को मध्याह्न १२ बजे तक हो जायेगा।

आप शिविर का अच्छे से लाभ उठा सकें, इसके लिए आवश्यक है कि आप इन विषयों से पूर्व परिचित हों यथा चन्द्र-पृथ्वी-सूर्य की गतियां, उनकी कक्षायें, अक्षांश व देशान्तर रेखायें, वृत्त व त्रिकोण, सूर्य ग्रहण-चन्द्र ग्रहण। ये विषय आधुनिक विज्ञान की प्रारंभिक पुस्तकों में मिल जाता है। इसे आप यूट्यूब, गूगल खोज आदि से भी सरलता व ठीक से समझ सकते हैं। भारतीय मास, राशि, ग्रह व नक्षत्रों के नाम पहले से स्मरण होंगे तो ज्योतिष सरलता से स्पष्ट होता चलेगा।

आयोजकों की ओर से सभी शिविरार्थियों को वैदिक पञ्चाङ्ग, संचिका व लेखनी उपलब्ध कराई जायेगी। आशा है यह शिविर आपको विशेष व नई दृष्टि प्रदान करेगा, जिससे आप जीवन भर लाभान्वित होते रहेंगे।

शिविर शुल्क – २०००/-

निवास सामूहिक निःशुल्क होगा। पृथक् एकाकी, दो या चार व्यक्ति वाले कक्ष सशुल्क होंगे। जिनमें पंखा या वातानुकूलन के अनुसार शुल्क होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here