एक महाशय जी
एक महाशय जी गाँव पधारे
गाँव में जाय उपदेश सुनायो,
वेद मन्त्र उच्चारण करके
सत्स-असत्य मार्ग बतलायो ।
एक ईश्वर व्यापक कण-कण में
मुख्य ओ३म् को नाम बतायो,
उसी ईश के बनो उपासक
जगह-जगह क्यों मन भटकायो ।
एक चौधरी उठ के बोला
महाशय जी इस ओर लखाओ,
इस भाषण को बन्द करो
अब कोई फिल्मी गीत सुनाओ।
इतनी सुनकर उठे सभा से
मैंने वृथा समय गवांयो,
ना काले कम्बल पर चढ़े रंग
ज्यों भैंस के आगे बीन बजायो।
























