दुनिया है दुश्मन, दुश्मन चौफेरा

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दुनिया है दुश्मन, दुश्मन चौफेरा

दुनिया है दुश्मन, दुश्मन चौफेरा,
सर पर है गर्दिश का घेरा,
समय को
पहचान, नौजवान, सावधान।।टेक ।।

कई वर्ष संघर्ष में बीते,
कब तक देखोगे यह फजीते
यत्र तत्र सर्वत्र है रोना,
अब रोने से कुछ नहीं होना,
आगे कुआ है, पाछे है झेरा,
सर पर है।।1।।

घर के भेदी दुश्मन घर में,
छुपे छुपे छुरे घोपें कमर में,
कौन है अपना कौन पराया,
यदि यह तू जान न पाया,
बचना है मुश्किल हलचल में तेरा,
सर पर है। ।2।।

औरों के लिये दुनिया भर है,
तेरा तो बस एक यही घर है,
अपने घर को तोड़ फोड़कर,
कहां जायेगा इसे छोड़कर,
बन्द है रस्ते, घोर अन्धेरा,
सर पर है।।3।।

तेरे घर में तेरी पिटाई,
हो रही फिर भी शर्म न आई,
कायरता का जीना जीकर,
इस जीने से मरना बेहतर,
चिंतित है प्रेमी नित्य शाम सवेरा,
सर पर है।। 4।।