धरती और ये आसमां,कह रहे हैं दास्ताँ।

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धरती और ये आसमां,कह रहे हैं दास्ताँ।

धरती और ये आसमां,
कह रहे हैं दास्ताँ।
शिष्य रहा इस देश का,
सदियों तक सारा जहाँ ।।
भूलों ना याद करो।। टेक ।।

झूठे मत और पन्थ नहीं थे
कपोल कल्पित ग्रन्थ नहीं थे।
एक इष्ट आराध्य देव था।।1।।

ज्ञान विज्ञान कला कौशल में,
सर्वोत्तम था भूमण्डल में।
आज देखलों दशा यह है क्या।।2।।

महाभारत के युद्ध के पीछे,
गिरने लगा था भारत नीचे।
गिरता गिराता कहाँ जायेगा।।3।।

अनेकों जाति अनेकों फिरके,
बन गये अब सिद्धान्त से गिरके।
‘प्रेमी’ अतीत का ध्यान रहा ना।।4। |