भले अकेले रहता है तू
भले अकेले रहता है तू,
सहता सब कुछ पीर।
जग में इक दिन ऐसा आवे,
जाओगे आखिर ।।
पिता पुत्र नारी सब कुछ है,
दूर रहे नहीं तीर।
मोही क्यों उनके खातिर
तू बहा रहा है नीर।।
परमपिता के ध्यान लगा ले,
चरण कमल पें सिर।
चन्द्रशेखर कह इस विधि तेरा,
सफल होय तकदीर ।।










