बीती जा दिन रैन कर्म कुछ कर जाओ
स्वर :- मै जागू सारी रैन
बीती जा दिन रैन कर्म
कुछ कर जाओ
दुर्व्यसनों का कर दे
मर्षण लेकर के सत्पथ की
मथनी जैसा बोया
वैसा काटो जैसी करनी
वैसी भरनी ये है
ऋषियों के बैन कर्म कुछ कर जाओ।।१।।
अपनी जीवन डोरी को तुम
मकड़ी के सम ना उलझाओं
जल के ऊपर रहो कमल सा
कीचड़ में ना इसे धसाओ
पापो का करो दहन कर्म
कुछ कर जाओ।। २।।
जीवन उपवन जिस दिन
तेरा महक उठेगा बन कर
चन्दन सारी गाठे स्वयं ही
खुल कर तोड़ेगी सब
दुःख के बन्धन फिर है चैन
ही चैन कर्म कुछ कर जाओ।। ३।।










