आया है जहाँ में शुभ कर्म कमाके जा।
आया है जहाँ में
शुभ कर्म कमाके जा।
देख निराली दुनियाँ,
मत ना जीवन व्यर्थ गंवा।
प्रातः सायं ओ३म् को गाले।
परम पिता से प्रीति लगा ले।
‘जीवन में उपकार किया कर,
मत ना पाप कमा ॥ १ ॥
सहस्र करों से दान किया कर।
अमृत बाँट अमृत तू पिया कर ।।
जीवन से जीवन बन जाये
ऐसी ज्योति जगा ॥ २ ॥
मननशील हो व्यक्ति कहावे।
ऐसा लेख वेद बतलावे।
मनुर्भव उच्चारण करके
वेद रहा समझा ॥ ३ ॥
अमृतमयी वेद की वाणी।
‘राघव’ पढ़कर देख प्राणी।
परम धर्म वेदों का पढ़ना,
मिथ्या नहीं जरा ॥ ४ ॥
जब नाश मनुष्य पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है।










