प्रभो ! बुद्धि निर्मल हमारी बना दो।

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प्रार्थना

प्रभो ! बुद्धि निर्मल हमारी बना दो।
पिता, अपनी भक्ति का अमृत पिला दो।।

न मन में हमारे कभी हो अन्धेरा
न अज्ञान हो न अविद्या का डेरा
सदा आत्मा में हो प्रकाश तेरा
हमें धर्म की राह चलना सिखा दो।
प्रभु ! बुद्धि निर्मल हमारी बना दो।।1।।

तेरे चरणों में ध्यान अपना लगायें,
न मन-रूपी शीशे को मैला बनायें,
कभी सत्य मार्ग से पग न हटायें
सदाचार का पाठ हमको पढ़ा दो।
प्रभु !बुद्धि निर्मल हमारी बना दो।।2।।

न ‘नंदलाल’ ने भक्ति में मन लगाया
विषय-वासना में है जीवन गँवाया।
शरमसार होकर तेरे द्वार आया।
भंवर में है किश्ती, किनारे लगा दो।
प्रभु ! बुद्धि निर्मल हमारी बना दो। ।3।।