तेरी अपार महिमा, कैसे बयान होवे।

0
291

ईश महिमा

तेरी अपार महिमा, कैसे बयान होवे।
कुछ बोलने से पहले, गूंगी जबान होवे ।।

भगवान तुम से बढ़ कर, दुनियाँ में कौन होगा।
अब तक नहीं मिला जो, तेरे समान होवे ।।
तेरी अपार महिमा…….

तेरी महानता की, सीढ़ी को छू ना पाए।
दुनियाँ में कोई चाहे, कितना महान होवे।।
तेरी अपार महिमा……..

जिस आदमी के सर पर, करुणा का हाथ रख दे।
उसकी हर एक मुश्किल, पल में आसान होवे।।
तेरी अपार महिमा……….

किसकी मजाल कोई, तेरे खिलाफ बोले।
सारे जहाँ में लागू, तेरा विधान होवे ।।
तेरी अपार महिमा………..

आँखों से देखने की, तू चीज ही नहीं है।
अन्तःकरण में तेरा, प्रत्यक्ष ज्ञान होवे।।
तेरी अपार महिमा………

जीवन में लोग तुझको, पहले नहीं बुलाते।
तब ‘पथिक’ याद करते, जब लब पे जान होवे।।
तेरी अपार महिमा……….