आया झंडाधारी वेद धर्म का उडाया झंडा

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आया झंडाधारी वेद धर्म का उडाया झंडा

दयानन्द बावनी
कवि दूलेराय काराणी

झंडाधारी

आया झंडाधारी वेद धर्म का उडाया झंडा।
मंत्र ओम्कार तें जगत को जगायो है।।

पाप-ताप, क्लेश-द्वेष, जेर-जुल्म जारिबे को।
कहा महिमण्डल पे महानल आयो है।।

कृण्वन्तो विश्वमार्यम् एक वेद-मन्त्र हु ते।
काराणी कहत सारे हिन्द को हिलायो है।।

धर्म धारिबे को आर्यावर्त के उद्घारिबे को।
डूबतों के तारिबे को दयानन्द आयो है।।२९।।