दयानन्द बावनी
कवि — दूलेराय कराणी
जेते नभ तारे हैं
दलित तारक सारे समाज के सुधारक।
आर्य नारी उद्धारक अनाथ उबारे हैं॥
थापे आर्य शिक्षण के केते-केते गुरुकुल।
जाति-पाती, जड़ रूढ़ि-बंधन बिदारे हैं॥
स्वराज स्वदेशी प्रेमी परं देशभक्त तूने।
सर्वांग समाज के प्रदीप्त कर डारे हैं॥
कराणी कहत गुण गिनती करी न जात।
ऐते उपकार तेरे जेते नभ-तारे हैं॥ ३७॥
























