अभी तो और बढ़ना है
अभी तो और बढ़ना है, अभी तो और चलना है।
हमें तो लक्ष्य पाना है नहीं अभी हमको थकना है।।
दयानंद के सिपाही हैं , सभी हम धुन के पक्के हैं।
सीखा है नहीं रुकना , हमारे ऊंचे सपने हैं।।
आर्य विश्व हो सारा – यही संकल्प अपना है ..
हमें तो लक्ष्य पाना है नहीं अभी हमको थकना है।। 1 ।।
हम नायक हैं जगती के , विधि के हम विधायक हैं।
गायक हम हैं वेदों के , हमीं भूगोल पालक हैं।।
हमीं सुरलोक स्वामी हैं, सदा ये ध्यान रखना है….
हमें तो लक्ष्य पाना है नहीं अभी हमको थकना है।। 2 ।।
चमन को रखना है रोशन, रोकनीं बिजलियां हमको।
सुखाने घाव सारे हैं , हैं करनी पट्टियां हमको ।।
सनातन को बढ़ाना है , धर्म पर सबको चलना है …
हमें तो लक्ष्य पाना है नहीं अभी हमको थकना है।। 3 ।।
ना छूटेगा कोई पीछे , चलेंगे साथ में सारे।
ऋषि सेना के सैनिक हैं, रुकेंगे लक्ष्य पर सारे।।
बढ़ते ही चलो प्यारे , पथ को सर पे रखना है….
हमें तो लक्ष्य पाना है नहीं अभी हमको थकना है।। 4 ।।
अभी भी भूख छाई है, अभी भय का शिकंजा है।
भ्रष्टाचार हावी है , चूस रहा खूनी पंजा है।।
असंभव आदमी मिलना असंभव न्याय मिलना है….
हमें तो लक्ष्य पाना है नहीं अभी हमको थकना है।। 5 ।।
अभी भी आदमी ही आदमी को न आदमी माने।
असंभव ढूंढना उसको जो सच में धर्म को जाने।।
दयानंदी वही आंधी , फिजा हमको बदलना है …..
हमें तो लक्ष्य पाना है नहीं अभी हमको थकना है।। 6 ।।
शौर्य कर्म हो अपना , आर्य दिव्य हो जीवन।
वीरता भाव हो अपना , निडरता ही बने भूषण।।
ज्ञानमय हो मेरा जीवन यही संकल्प धरना है ……
हमें तो लक्ष्य पाना है नहीं अभी हमको थकना है।। 7 ।।
























