कर्म खोटे तो ईश्वर
कर्म खोटे तो ईश्वर का भजन करने से क्या होगा,
किया परहेज कुछ भी न, दवा खाने से क्या होगा।
समय पर एक ही ठोकर बदल देती है जीवन को,
जो ठोकर से भी न समझे तो, उसे समझाने से क्या होगा।
कर्म खोटे..….
समाँ बीता हुआ हरगिज कभी न हाथ आएगा,
लिया चुग खेत चिड़ियों ने, अब पछताने से क्या होगा।
कर्म खोटे…..
मुसीबत तो टले मरदानगी के मुकद्दर पर भरोसा करके,
सो जाने से थपेड़ों से, क्या होगा।
कर्म खोटे…..
तू मुट्ठी बाँधकर आया और खाली हाथ जाएगा,
‘पथिक’ मालिक करोड़ों का भी कहलाने से क्या होगा।
कर्म खोटे..…























