ईश्वर को भी तू याद
ईश्वर को भी तू याद किया कर कभी-कभी।
आत्मिक तृषा को भी बुझा लिया कर कभी-कभी ।।
दुनिया के झंझटों में पड़ ईश भुलाया।
भूले हुए की याद किया कर कभी-कभी ।।
उसकी कृपा से तूने, नर तन है यह पाया।
धन्यवाद उस प्रभु का किया कर कभी-कभी ।
भोगों के भोगने में समय तूने बिताया।
भोगों के देने वाले को सिमरा कर कभी-कभी ।।
जिस दिल में तू बसा, वह बड़ा खुशनसीब है।
उस पर तेरी कृपा भी होती है कभी-कभी ।।
ईश्वर की रचना देखकर होती है हैरानी।
खो जाया कर तू ‘इन्द्र’ उसी में कभी-कभी ।।
























