तू काहे करे अभिमान
तू काहे करे अभिमान
खिलौने माटी के (1)
है वक्त बड़ा बलवान्
खिलौने माटी के
सुख में तो तुझे गले लगाए
दुःख हो तो तुझे दूर भगाए
तू इसकी सच्चाई जान
खिलौने माटी के
जीव जन्म अनमोल है प्राणी
तूने इसकी कदर न जानी
जरा खुद को ले पहचान
खिलौने माटी के
संसार मुसाफिर खाना है
इक दिन तो सबको जाना है
सब दो पल के मेहमान
खिलौने माटी के
तूने धन दौलत तो खूब कमाई
पर अन्त समय सब जा नहीं पाई
कर ले प्रभु का ध्यान
खिलौने माटी के










