ओ३म् जपो मेरे भाई
ओ३म् जपो मेरे भाई,
ओ३म् जपो मेरी बहना।
अन्त समय तक इस वाणी से,
ओ३म्, ओ३म् ही कहना ।। टेक ।।
ओम् जपे से मन के,
कल्मष धुल जाते हैं।
ओम् जपे से सारे,
बन्धन खुल जाते हैं।
ओम् ही सबका मुकुटमणी है,
ओम् ही सबका गहना ।१। ओ३म् …
ओम् नाम का सुमिरन,
सुख पहुंचाता है।
ओम् नाम का चिन्तन,
मन हरसाता है।
अमृत के सागर में प्रेमी,
मस्त मगन ही रहना । २। ओ३म् …
प्रभु की भक्ति बिन नहीं मुक्ति,
दृढ़ विश्वास जमाओ रे।। शरण..
करलो नाम प्रभु का सुमिरन,
अन्त को ना पछताओ रे।। शरण…
छोटे बड़े सब मिल कर खुशी से,
गुण ईश्वर के गाओ रे।। शरण……









