ये जीवन तुम्हारा
ये जीवन तुम्हारा
तुम्हीं को है अर्पण।
लगा दो किनारे से
ओ मेरे भगवन् ।
दया के ही सागर
दया के हो दाता।
तुम्हीं जग के पालक
तुम्हीं हो विधाता।
ये सोया है मानव
इसे तुम जगा दो।
मैं पथ से गिरुँ तो
मुझे थाम लेना।
दया करके सद्बुद्धि
देते ही रहना।
जो सच्चा है मार्ग,
उसे तुम दिखाओ।
मझधार में है ये
जीवन की नैया।
इसे पार कर दो
ओ मेरे खिवड्या।
कहीं डूब न जायें
इसे तुम बचाओ ।
बरस दो बड़ा ऐहसान
होना तुम्हारा।
भटकता ही रहता है
मनवा हमारा।
इसे वश में करने
की युक्ति बता दो।










