यह देश बिगड़ जाता,दयानन्द नहीं आता।
यह देश बिगड़ जाता
दयानन्द नहीं आता।
ये ऋषि की महिमा सारी बने
भगतसिंह प्रचारी।
नहीं दुर्व्यसनों में पड़ जाता
दयानन्द नहीं आता….।
भारत की उच्च कोटि को,
जनेऊ और चोटी को।
अंग्रेज रगड़ जाता-
दयानन्द नहीं आता……….
तजकर वेदों की वाणी
लोग बन जाते कुरानी।
तूं कलमा पढ़ जाता
दयानन्द नहीं आता………।
गर दयानन्द ना आता
सत्यार्थ कौन बनाता।
कहीं बाइबिल चढ़ जाता
दयानन्द नहीं आता……
कृष्ण की गीता प्यारी
का राम की फूलवारी का,
यह बाग उजड़ जाता
दयानन्द नहीं आता………।
कहाँ थी ब्रह्मचर्य की शिक्षा
कैसे होती ताकत की रक्षा।
देश व्यभिचार में सड़ जाता
दयानन्द नहीं आता……।
ना होती धूप की थाली,
ना बजती पोप की टाली।
तेरा गरुड़ गिरड़ जाता
दयानन्द नहीं आता……!










