वह कौन आया चौक उठी है

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वह कौन आया चौक उठी है

वह कौन आया चौक उठी है
दुनिया जिसके नाम से।
पाखण्डियों में हलचल
मच गई है किसके प्रोग्राम से ।।

गलियों से बाजारों से,
झौपड़ियों चौबारों से।
वेद ऋचायें गूंज उठी हैं
श्वासों की झंकारों से,
बागों से बहारों से ।।
किसके दर्शन को उमड़ी है,
जनता नगर घर ग्राम से ।।1।।

मस्जिद की बुतखानों की,
पोपों की मुल्लानों की।
धज्जियाँ उड़ाई बाईबिल
इंजील कुरान पुरानों की
पुष्टि से प्रमाणों की।।
डेढ अरब दुनिया थी
विरोधी इकला लड़ा तमाम से।।2।।

धर्म है क्या और अधर्म क्या,
जीव है क्या और ब्रह्म है क्या।
ठीक ठीक सबको समझाया
जाति क्या वर्णाश्रम क्या,
जीव को जग में भ्रम है क्या।।
मोक्ष का साधन धर्म का पालन,
काम चले नहीं दाम से।।3 ।।

वेद के सूरज के आगे,
उल्लू चमगीदड़ भागे।
मजहब को एक ढ़ोंग समझ,
सब मतमतान्तर वाले जागे,
सब उलटे झगड़े त्यागे ।।
वैदिक धर्म की दीक्षा लेने
आ रहे शोभाराम से ।।4।