विषयों में काहे जाये तुझको समझ न आये

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विषयों में काहे जाये तुझको समझ न आये

विषयों में काहे जाये
तुझको समझ न आये
प्यारे प्रभु से मनवा !!!
प्रीति लगा ले

गङ्गा व यमुना जाए
पगले तू मल-मल नहाये
मन में कपट है तेरे
प्रभु को समझ न पाये
मन के भवन में अपने
ज्योति जला ले
विषयों में काहे जाये

मदिरा में डूबा है तू
पापों में जाता है तू
पशुओं को मारा तूने
सब उनको खाता है तू
बाज आ बदी से बन्दे
जीवन बचा ले


विषयों में काहे जाये
तुझको समझ न आये
प्यारे प्रभु से मनवा !!!
प्रीति लगा ले
विषयों में काहे जाये

छोड़ दे खुदी को पगले
अब क्षण बचा ले अगले
सताया है जिनको तूने
देने पड़ेंगे बदले


सर पर है कितना बोझा
कुछ तो हटा ले
विषयों में काहे जाये
तुझको समझ न आये
प्यारे प्रभु से मनवा !!!


प्रीति लगा ले
विषयों में काहे जाये

यम और नियम को जानो
वेदों की बातें / शिक्षा मानों
जो वस्तु जैसी उसको
वैसा ही सत्य मानो


“कल्याण वेदी” तू भी
प्रभु गीत गा ले
विषयों में काहे जाये
तुझको समझ न आये
प्यारे प्रभु से मनवा !!!


प्रीति लगा ले
विषयों में काहे जाये
तुझको समझ न आये
प्यारे प्रभु से मनवा !!!


प्रीति लगा ले
विषयों में काहे जाये
विषयों में काहे जाये
विषयों में काहे जाये

रचनाकार व स्वर :- श्री कल्याण सिंह जी वेदी