ईश महिमा
तूने बनाया है, ये सब जहान।
तू है महान, प्रभु तू है महान।।
सारे जगत का मालिक, तू ही तो एक है।
कैसे संभाले जाने, कार्य अनेक हैं।
महिमा तेरी से हम, हैं अनजान।।
तू है महान, प्रभु…………
जमीन आसमान, पर्वत और समन्दर।
हम करें कैसे तेरे, गुणों का बखान।।
कैसे रमा है तू, इसके अन्दर।
तू है महान, प्रभु …….
हर कर्म का फल, भोगना पड़ेगा।
कोई जोड़ तोड़, और ना भोग चढ़ेगा।
तेरे यहाँ है सच्चे, न्याय का विधान।।
तू है महान, प्रभु…………
चारों दिशाओं में, तुझको निहारू।
सब कुछ अपना, तुझ पर वारूँ।
हर पल गाऊँ, प्रभु तेरा गुण गान।।
तू है महान, प्रभु………..
एक नाम की सत्ता, सारे जगत में।
सब कुछ नश्वर, ‘ओ३म्’ ही अन्त में।
आदि अनादि हो, सर्वशक्तिमान् ।।
तू है महान, प्रभु………










