तू ही एक रक्षक है (तर्ज- तुम्ही मेरे मन्दिर तुम्ही मेरी पूजा)
तू ही एक रक्षक है
आधार मेरा।
मैं सेवक हूँ तेरा तू करतार मेरा।।
तेरे दर को तज कर
मैं किस दर पे जाऊँ।
दुःखी मन की गाथा
किसे मैं सुनाऊँ।।
मैं हूँ एक याचक.
तू दातार मेरा। मैं सेवक हूँ…
यह बन्धु भी अपने है
यह मुझको यकीन है।
मगर तुझ सा अपना
कोई भी नहीं है।।
तू ही हर समय है
मददगार मेरा।। मैं सेवक हूँ……..
मैं हूँ एक देशी तू
कण-कण में व्यापक।
मैं हूँ क्षुदप्राणी तू
सृष्टि का नायक।
मैं छोटी से नैय्या
तू पतवार मेरा।।
मैं सेवक हूँ…..
पथिक पल में सृष्टि
बना देने वाले।
पल भर मे इसको
मिटा देने वाले।।
तुझे कोटि-कोटि
नमस्कार मेरा। मैं सेवक हूँ…..










