“सुनो सुनो ऐ दुनिया वालों
“सुनो सुनो ऐ दुनिया वालों -२
सुनो बात अनमोली।
आई दयानन्द की टोली ,
आई दयानन्द की टोली।।
नीति हमारी सबसे न्यारी,
प्रीति हमारी जनहित कारी।
प्रीत निराली, रीत निराली,
और निराली बोली।।१।।
आई दयानन्द की टोली….
जाती पांति का भेद न पाए,
हम सब एक हैं भाई-भाई।
ऊंच नीच और भेदभाव की
करदी हमने होली।।२।।
आई दयानन्द की टोली….
ऋषि दयानन्द ज्ञान समन्दर,
हवा हो गए जंतर मन्तर।
झूठे पन्थ पादरी पण्डित,
पोल सभी की खोली।।३।।
आई दयानन्द की टोली…..
विद्याशंकर सत्य कर्म की
शुद्ध कमाई वेद धर्म की।
नित्य लुटाता जाता है
कोई भरले अपनी झोली।।४।।”










