सुबह दुहो शाम दुहो

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सुबह दुहो शाम दुहो

सुबह दुहो शाम दुहो,
प्रभात दुहो मध्याह्न दुही ।।१।।

ब्रह्म तो अमृत अनन्त है,
हर पल हर क्षण ज्ञान दुहो ।। २।।

घट घट उसकी शक्ति है,
भक्ति कर से आसान दुहो ।। ३।।

वेद तो उसकी तान है,
महनत कर नया विहान दुहो ।।४।।