सृष्टि से पहले, अमर ओ३म् नाम था….2

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चेतावनी

सृष्टि से पहले,
अमर ओ३म् नाम था….2
आज भी है और कल भी रहेगा….2

सूरज की किरणों में,
उसी का नेत्र समाया है,
और चाँद सितारों में,
उसी की शीतल छाया है,
धरती की गोद में, उसी का दुलार था……
आज भी है और……..

भँवरों के गानों में,
मधुर संगीत उसी का है,
फूलों के यौवन में,
रसीला गीत उसी का है,
आकाश, जल, स्थल का,
वही कलाकार था…… 2
आज भी है और…….

सुख-दुःख का ये लम्बा खेल,
विधाता ने जो रचाया है,
ओ बन्दे तेरी करनी का,
नक्शा सामने आया है,
तेरे पिछले कर्मों का,
उसी पे हिसाब था….. 2
आज भी है और………

तू मत कर इतना गुमां,
कि इक दिन जान निकल जाएगी,
तेरी सजी सजाई काया,
मिट्टी में मिल जाएगी,
मुक्ति का इक रास्ता,
प्रभु का ही ध्यान था…….2
आज भी है और………