सात ऋषि तो देह में रहते
सात ऋषि तो देह में रहते
यज्ञ करें कर्मों का
आत्मा के प्रियपद की रक्षा
उनकी वैदिक प्रथा
होऽऽऽऽऽऽ
उनकी वैदिक प्रथा
पाँच इन्द्रियाँ बुद्धि और मन
आत्म-अभीष्ट की करते रक्षा
परकल्याण से निज सुख पाते
यह ऋषियों की सफलता
आत्मा के प्रियपद की रक्षा
उनकी वैदिक प्रथा
होऽऽऽऽऽऽ
उनकी वैदिक प्रथा
बहिर्मुखी यदि इन्द्रियाँ होती
विषय-सुखों का हेतु बनतीं
अन्तर्मुख यदि यह हो जातीं
ब्रह्मानन्द रस मिलता
आत्मा के प्रियपद की रक्षा
उनकी वैदिक प्रथा
होऽऽऽऽऽऽ
उनकी वैदिक प्रथा
इन्द्रियों ने निज मद में आकर
प्रतिस्पर्धा आपस में लगाई
मृत्यु ने जब आकर घेरा
लगा गर्व को झटका
आत्मा के प्रियपद की रक्षा
उनकी वैदिक प्रथा
होऽऽऽऽऽऽ
उनकी वैदिक प्रथा
कहे इन्द्रियाँ वाह रे आत्मा !
तू ही श्रेष्ठ अमरपद पाता
और हमें समरूप बनाता
पायें तुझसे दृढ़ता
आत्मा के प्रियपद की रक्षा
उनकी वैदिक प्रथा
होऽऽऽऽऽऽ
उनकी वैदिक प्रथा
देह मानुष की पवित्र माटी
यहाँ देव सब चाह से आते
बीज सुकर्मों के निज बोते
आत्मरूप निखरता
आत्मा के प्रियपद की रक्षा
उनकी वैदिक प्रथा
होऽऽऽऽऽऽ
उनकी वैदिक प्रथा
सात ऋषि तो देह में रहते
यज्ञ करें कर्मों का
आत्मा के प्रियपद की रक्षा
उनकी वैदिक प्रथा
होऽऽऽऽऽऽ
उनकी वैदिक प्रथा
होऽऽऽऽऽऽ
उनकी वैदिक प्रथा










