सकल जगत् के स्वामी, मेरे हृदय में वास करो
सकल जगत् के स्वामी
मेरे हृदय में वास करो
दुर्गुण और दुखों से बचा कर
सब सन्ताप हरो
जग की रचना करने वाले
मन में आनन्द भरने वाले
उत्सव बन जाये सारा जीवन
ऐसा प्रभु जी कर दो
समग्र ऐश्वर्य युक्त मेरे दाता
तुझसे ही हर जीव सुख पाता
मन वीणा की तारें
मन में अब झंकृत कर दो
वेद शास्त्र तेरा भेद बताये
वेद उपवेद तेरा भेद बताये
दुनिया में हमें जीना सिखाये
कृपा करो हे नाथ हमारे
सद् बुद्धि दे दो
तेरी दया से ये जग चलता
चींटी से हाथी तक पलता
तुम्हीं हो नाथ हमारे
मन को आनन्दित कर दो
मुझे गुण कर्म स्वभाव उत्तम दो
कृपा से अपनी प्राप्त करा दो
करे “मिथिलेश” विनय
प्रभु जी सबका कल्याण करो










