प्रेमी बनकर प्रेम से

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प्रेमी बनकर प्रेम से

प्रेमी बनकर प्रेम से,
ईश्वर के गुण गाया कर।
मन-मन्दिर में गाफिला,
झाडू रोज लगाया कर।

देख दया उस परमेश्वर की,
वेदों का जिसने ज्ञान दिया।
तू मन में सोच जरा तो,
कितना है कल्याण किया।
सब कमर्मों को छोड़कर,
ईश्वर को तू ध्याया कर।

सोने में तो रात गुजारी,
दिन भर करता पाप रहा।
इसी तरह बरबाद तू बन्दे,
करता अपने आप रहा।
प्रातः समय उठ नित्य प्रत्ति,
सत्संग में तू जाया कर।

नर तन के चोले का पाना,
बच्चों का कोई खेल नहीं।
जन्म-जन्म के शुभ कर्मों का,
होता जब तक मेल नहीं।
नर तन पाने के लिए,
उत्तम कर्म कमाया कर।

दुखिया पास तेरे है कोई,
तूने भूखा प्यासा पड़ा पड़ोसी,
तूने मौज उड़ाई क्या?
रोटी खाई क्या?
सबसे पहले पूछकर,
भोजन को तू खाया कर।