ओ३म् नाम का सुमिरन करले

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ओ३म् नाम का सुमिरन करले

ओ३म् नाम का सुमिरन करले
करदे भव से पार तुझे।
कह दिया कितनी बार तुझे ॥

तुझसे पहले गए बहुत से
कितना धन ले साथ गए।
लक्ष्मणसिंह ‘बेमोल’ कहे
वो सारे खाली हाथ गए।
तू भी खाली हाथ चलेगा
देखेंगे नर-नार तुझे….।

जिस नगरी में वास तेरा
ये ठग चोरों की बस्ती है।
लुट जाते हैं बड़े-बड़े फिर
तेरी तो क्या हस्ती है।
जिसको अपना समझ रहा
ये धोखा दे संसार तुझे…

हाथ जोड़कर गली-गली
जो मित्र तुम्हारे डोल रहे।
कोयल जैसी मोठी वाणी
कदम-कदम पर बोल रहे।
बणी के साथी बिगड़ी में
ना गले लगाएं यार तुझे….।

दौलत का दिवाना बनकर
धर्म-कर्म सब भूल रहा।
पाप-पुण्य का पता नहीं
कुछ नींद नशे में टूल रहा।
ईश्वर को भी नहीं जानता
ऐसा चढ़ा खुमार तुझे….।