ओ३म् का नाम
ओ३म् का नाम क्यों तुझको भाता नहीं?
क्यों शरण में तू वेदों की आता नहीं?
काहे रटना लगाये सिया राम की।
बाट जोहे क्यों नाहक तू घनश्याम की।
जन्म लेके सदा रहने पाता नहीं ।। 1 ।। क्यों
छोड़कर तेरा सच्चा सहारा प्रभु ।
तज के वेदों का पौराणिक सहारा गहूं।
इस अवस्था में तो चैन पाता नहीं।।2।। क्यों
जीवित माता पिता का अनादर किया।
बाद मरने के श्रद्धा से तर्पण किया।
शास्त्र में जिसका प्रमाण पाता नहीं।।3।। क्यों
जबकि निराकार सृष्टिकर्ता है।
फँस अविद्या में माना क्यों साकार है ?
योग-साधन बिना उसको पाता नहीं।।4।। क्यों
‘बालकृष्ण’ दिया जिसने मार्ग दिखा।
उस प्रभु का दिया जिसने मार्ग बता।
उस ऋषि के तू क्यों गान गाता नहीं।। 5 ।। क्यों”
























