मुझ में ओ३म् तुझ में
मुझ में ओ३म् तुझ में ओ३म्
सब में ओ३म् समाया।
सबसे कर लो प्यार जगत् में
कोई नहीं पराया।
छूत छात और भेदभाव की
दीवारों को तोड़ो।
टूट गये हैं मन के मन्दिर
प्रेम से इनको जोड़ो।
बदला जमाना हम भी बदलें,
समय है ऐसा आया।
जितने ये संसार में प्राणी
उन सब में एक ही ज्योति।
एक ही बाग के फूल हैं सारे,
एक माला के मोती।
एक ही कारीगर ने सब को
एक माटी से बनाया ।।
एक बाप के बेटे हैं
हम एक हमारी माता।
दाना पानी देने वाला
एक हमारा दाता।
फिर ना जाने किस मूर्ख ने
लड़ना हमें सिखाया।










