प्रार्थना
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता,
जीवन में लगे ठोकर न कहीं।
जाने अनजाने भी मुझ से,
नुकसान किसी का हो न कहीं। ।।।।
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता …………
उपकार सदा करता जाऊँ।
दुनिया अपकार भले ही करे।
बदनामी न हो जग में मेरी,
कोई नाम भले ही दे न कहीं।।2।।
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता ……….
जो तेरा बनकर रहता है,
काँटों में फूल सा खिलता है।
कितने भी काँटे पांव चुभे पर
फूल भी हों काँटे न कहीं। ।3।।
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता ……….
तू ही बस मेरा ऐसा है,
दुःख में भी साथ नहीं तजता।
दुनिया मुझे प्यार करे न करे,
खोऊँ तेरा भी न प्यार कहीं।।4।।
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता ………
मन को मधुपूर्ण कलश मेरा,
आँखों से ज्योति छलकती हो।
तुम से मधु ऐसा पीने को,
जागता ही रहूँ, सोऊँ न कहीं। ।5।।
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता …………
मैं क्या हूँ, राह मेरी क्या है,
यह सत्य सदा मैं समझ सकूँ।
इस राह पे चलते-चलते कभी,
मेरे पाँव थके न, रूके न कहीं। ।6।।
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता …………
वह जो ना प्रातः और ना सायं ईश्वर को याद करता है, उसे शूद समझना चहिए।










