मेरी बेटी थी आँखों का तारा।
तर्ज – सारी सुष्टि दुल्हन सी……
मेरी बेटी थी आँखों का तारा।
मौत के घाट, किसने उतारा।।
मेरी बेटी की गलती बता दो
ओ ‘सचिन’ कुछ तो मुझको पता दो
बड़ी बेदर्दी से इसको मारा
मौत के घाट……….
दुनियाँ वालों ये क्या शर्त निभायी
बन्द कमरे में देवी जलायी
क्यों इतना किया है किनारा
मौत के घाट………
अपनी माता से जब ये मिली थी
खूब कलियाँ खुशी की खिली थी
बेटी रूपी ये फूल था प्यारा
मौत के घाट……….
दर्द दिल का मैं किसको सुनाऊँ
बीते लम्हों को कैसे भुलाऊँ
क्यों मौत ने इसको पुकारा
मौत के घाट……….










