मेरे देश की बहिनों तुमको

0
241

मेरे देश की बहिनों

मेरे देश की बहिनों तुमको,
देख रही दुनियां सारी,
तुम पे बड़ी जिम्मेवारी
हर घर को तुम स्वर्ग बनादो,
हर आंगन को फुलवारी
तुम पे बड़ी जिम्मेवारी…..

तुम उस देश में जन्मी हो,
जिस देश में जन्मी थी सीता,
तुम उस देश की महिला हो,
जिस देश में गूंज रही गीता,
कभी भूलकर भी न लगाना,
किसी के घर में चिनगारी।
तुम पे बड़ी जिम्मेवारी…….

यह मत भूल न जाना बहिनों,
जहां फूल वहां कांटे भी,
जहाँ-जहाँ तुफान हैं आते,
वहाँ आते सन्नाटे भी,
तुम इस जग में हंस-हंस जीना,
कभी न करना मनमानी।
तुम पे बड़ी जिम्मेवारी……

यह पथ भूल न जाना बहिनों,
झूठे हर्ष विलासों में,
करना ऐसा कार्य यहाँ पर,
नाम रहे इतिहासों में,
दुनियां तुमको याद करेगी,
कैसी थी भारत की नारी।
तुम पे बड़ी जिम्मेवारी…….

‘माता निर्माता भवति’ लिखा,
लेख यह जाता है,
दुनियां का इतिहास तुम्हारी,
गौरव गाथा गाता है,
पद्मा, दुर्गा, किरण, लक्ष्मी,
वीर हुई विदुषी नारी।
तुम पे बड़ी जिम्मेवारी……

आज जरुरत है कि नारी,
अन्जना, कौशल्या व जीजाबाई के समान
माता, पार्वती व रुकमणि के समान पत्नी,
सीता के समान भाभी,
देवकी के समान संस्कार दात्री,
गार्गी के समान गुरु,
सुभद्रा व शास्त्री देवी के समान बहिन,
सुशीला, दुर्गा बोहरा व लक्ष्मी के समान, सच्ची
सखी, राणी हाडा के समान सच्ची
प्रेमिका व दुर्गा तथा झांसी के
समान राष्ट्र रक्षिका बनकर
देश के नक्शे को बदल डालें।