ओ३म् महिमा
मेरा सखा तो है वही, जिसका कि ओ३म् नाम है।
उसके बिना न दूसरा, ढूँढा जहाँ तमाम है।।
मेरा सखा तो है वही……..
जाता नहीं हूँ ढूँढ़ने, काशी व काबा में कहीं।
दिल की सफाई से उसे, मिलने का मेरा काम है।।
मेरा सखा तो है वही…….
कहते सभी महात्मा, कर लो पवित्र आत्मा।
जिसको हो शौक खोजिए, अन्दर ही स्वर्गधाम है।।
मेरा सखा तो है वही……..
वश में हो जिसने मन किया, उसने आनन्द पा लिया।
लागी रहे लगन सदा, प्रातः चाहे शाम है।।
मेरा सखा तो है वही………
रचना ही उसका रूप है प्रीतम जो सुन्दर रूप है।
उसके मिलाप के लिए कोई न रोकथाम है।।
मेरा सखा तो है वही………..










