कर कुछ नेकी, पास प्रभु के जाने के लिए।
कर कुछ नेकी,
पास प्रभु के जाने के लिए।
आया नहीं तू खाने,
और मर जाने के लिए।।
मस्त हुआ विषयों में ऐसे,
मौन को पगले भूल रहा,
धन यौवन ना रहे हमेशा,
जिस पर इतना फूल रहा,
खिला ये फूल जवानी का,
मुरझाने के लिए।।1।।
कर कुछ नेकी, पास प्रभु के……
विषय विकारों में फंस कर के,
जीवन को बरबाद न कर,
समय मिला अनमोल ए मानव,
अंत को तू फरियाद न कर।
आया है दुनिया में,
कुछ कर जाने के लिए।।
कर कुछ नेकी, पास प्रभु के…….
चार दिनों का है ये उजाला,
रात अँधेरी आए फिर,
इस पर इतना मान न कर तू,
आ करके तू जाए फिर।
महल बना है मिट्टी का,
गिर जाने के लिए ।।3।।
कर कुछ नेकी, पास प्रभु के……..
सद्गुरुओं के सत्संग में जा,
ज्ञान से मन को शुद्ध बना,
यम-नियम का पालन कर,
और नित ईश्वर में ध्यान लगा।
यही मार्ग है मुक्ति पद को,
पाने के लिए।।4।।
कर कुछ नेकी, पास प्रभु के…….










