जिस घर में एक दूजे की, बात जाय मानी
जिस घर में एक दूजे की,
बात जाय मानी,
उस घर कभी न आये,
कोई भी परेशानी।।
आकाश में नहीं है,
स्वर्गों की कोई दुनियाँ।
बेकार के भरम में,
भटकी हुई है दुनियाँ।।
वो ही घर स्वर्ग है,
जिसमें होती है मधुरवाणी।।1।।
जिस घर में एक दूजे की बात……
माता-पिता की सेवा,
भी फर्ज है हमारा।
माँ बाप से ही है,
नामों निशा हमारा ।।
माँ बाप की ही आज्ञा,
जाती है जहाँ मानी।।2।।
जिस घर में एक दूजे की बात……
सन्तान पैदा करके,
जो आजाद छोड़ देते।
ऐसे माँ बाप एक दिन,
सर को पकड़ के रोते ।।
बच्चों पे शुरू से ही,
रखते जो निगरानी।।3।।
जिस घर में एक दूजे की बात……
सन्तान जब बड़ी हो,
तो डन्डे से न मनाओ।
गर्मी छोड़ करके,
फिर प्यार से समझाओ।।
जहाँ प्यार है वहीं है,
सुख चैन की निशानी।।4।।
जिस घर में एक दूजे की बात……..










