ओ३म् महिमा
जाप ना किया है तूने ओ३म् नाम का।
करुणानिधान प्यारे सुख धाम का।। टेक ।।
जिन्दगी में कोई शुभ करम न किया।
धर्म ना किया, दूर भरम ना किया।।
बोल तेरा तन फिर किस काम का।।
जाप ना किया है तूने…….
दिन-रात जिसको सजाने में लगा।
अपने ही मन को रिझाने में लगा।।
कुछ ना बनेगा तेरे गोरे चाम का।।2।।
जाप ना किया है तूने…..
उल्टे ही कर्म तू कमाये उमर भर।
पेड़ ही बबूल के लगाये उमर भर।।
कहाँ से मिलेगा तुझे फल आम का।।3।।
जाप ना किया है तूने………
खुशी का पैगाम तो प्रभात लाई है।
और भी बेमोल कुछ साथ लाई है।।
जाने क्या संदेशा लाये वक्त शाम का।।4।।
जाप ना किया है तूने…………….










