जिस आदमी का सर झुके भगवान् के आगे।

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जिस आदमी का सर झुके भगवान् के आगे

जिस आदमी का सर झुके भगवान् के आगे।
सारी दुनियाँ झुकती है उस इन्सान के आगे।।
जिस आदमी का सर झुके …….।।1।।

खुले आकाश में,
उड़ती पतंगे साथ में डोरी।
मगर क्या डर उसे,
जिसकी प्रभु के हाथ में डोरी।
ताकत फीकी पड़ती है,
उस बलवान् के आगे।
जिस आदमी का सर झुके………..।।2।।

बड़े से भी बड़ा संकट,
उसे फिसला सकता नहीं,
मुसीबत के दिनों में वह,
कभी घबरा सकता नहीं।
उसको ठहरा पाओगे,
हर तूफान को आगे ।।
जिस आदमी का सर झुके ……….।।3।।

बसे वह देवता बनकर,
जमाने के खयालों में,
उसी के नाम की चर्चा,
अन्धेरों में उजालों में।
सूरज भी क्या चमकेगा,
उसकी शान के आगे।।
जिस आदमी का सर झुके………।।4।।

सारे इम्तिहानों में,
हमेशा पास होता है,
‘पथिक’ जीवन की राहों में,
कभी न उदास होता है।
मंजिल खुद आ जाती है,
उस मेहमान के आगे।।
जिस आदमी का सर झुके…….।।5।।