ज्ञान बढ़े गुणवान की संगति
ज्ञान बढ़े गुणवान की संगति,
ध्यान बढ़े तपसी संग कीने।
मोह बढ़े परिवार की संगति,
लोभ बढ़े धन में चित्त दीने ।।
क्रोध बढ़े नर मूढ की संगति,
काम बढ़े त्रिया संग कीने।
बुद्धि विचार विवेक बढ़े,
सत सज्जन संगति कीने।।
जड़ताई मति की हरत,
पाप निवारत अंग ।
कीर्ति, सत्य, प्रसन्नता,
देता है सत्संग।










