गाया कर नित्य गाया कर, तू गीत प्रभु के गाया कर।

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ओ३म् महिमा

गाया कर नित्य गाया कर, तू गीत प्रभु के गाया कर।
प्रातः सायं प्रेमपूर्वक ओ३म् ही ओ३म् ध्याया कर।

गीतों में भर प्यार हृदय के वाणी से बिखराता चल,
जीवन की इस रागिनी से तू गीतों को गूँजाता चल,
कोई सुने न सुने तुम्हारी अपने को ही सुनाया कर।
गाया कर नित गाया कर तू………..

गीतों की पावन धारा में अन्तर-मल को मिटा के देख,
राग, द्वेष, छल, कपट से प्यारे अपना आप बचा के देख
गीतों से फिर प्रेम सुधा का सबको पान कराया कर।
गाया कर नित गाया कर तू………

एकाग्र करके मन अपना निज को मस्त बना लेना,
गीतों के आनंद में ही तू मन की जोत जगा लेना,
औरों की चिन्ता न कर तू अपने को समझाया कर।
गाया कर नित गाया कर तू……..