एक ओ३म् नाम
एक ओ३म् नाम जग में,
है सर्व सुखों का सार।
जीवन की नैया का,
बस वही एक पतवार ।।
वह है सारे जग का स्वामी,
घट-घट वासी अन्तर्यामी।
उसे छोड़कर किसको ध्याऊँ
और कौन से प्रीत लगाऊँ ।।
देख लिया है मैंने सारा,
मतलब का संसार ।।1।
कण-कण में प्रभु आप समाये,
पास रहे पर नजर न आये।
वही न्यायकर्ता है ऐसा,
जैसी करनी फल दे वैसा।।2।।
महिमा अपरम्पार गए
ऋषि-मुनि विज्ञानी हार।
बिगड़ी तुम्हीं बनाने वाले,
संकट शूल मिटाने वाले।
हम तो तुम्हें भूल जाते हैं,
आप न हमें भूल पाते हैं।।
दीजे भक्ति दान “राघव”
को दीनबन्धु दातार।
एक ओ३म् नाम जग में है,
सर्व सुखों का सार ।।3।।
























