दुनियां में सबसे प्यार किया
दुनियां में सबसे प्यार किया,
प्रभु प्रेम का अमृत पी न सकी।
न याद रहा इकरार किया,
तेरा नाम सिमर कर जी न सकी।।
सब माता पिता बंधु भाई,
जो साथी नाती ये मेरे।
सब स्वार्थ था न सार मिला,
प्रभु प्रेम का अमृत पी न सकी। ।१।।
रिझते संगी कई टूट गए,
कई रूठ गए कई टूट गए।
अपना समझा इतबार किया,
प्रभु प्रेम का अमृत पी न सकी।।२।।
धन जन पाकर अहंकार बढ़ा,
भूलें पर भूलें करती रही।
अन्तर मुख हो न विचार किया,
प्रभु प्रेम का अमृत पी न सकी।।३।।
अब चैन नहीं दिन रात प्रभु,
कहाँ जाऊँ कैसे पाऊँ तुझे।
चिन्तन करके न सुधार किया,
प्रेम का अमृत पी न सकी।।४।।
हकीकत में इंसान वही नेक है।
जिसकी जवां और दिल एक है।










