दुनियाँ बनाने वाले, महिमा तेरी निराली।

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ईश महिमा

दुनियाँ बनाने वाले, महिमा तेरी निराली।
चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली।।

ऊँचे शिखर गिरी के आकाश चूमते हैं,
वृक्षों के झुरमुटे भी वायु में झूमते हैं,
सरिताएँ बहर्ती कल-कल, निर्मल से नीर वाली ।।
दुनियाँ बनाने वाले…….

पत्तों को खाके कीड़ा, रेशम बना रहा है,
है कौन जो उदर में, चरखा चला रहा है,
बुन-बुन के आ रहा है, रेशम का लच्छा जाली।।
दुनियाँ बनाने वाले……

फूलों का चूस के रस, कैसा मधु बनाए,
मधुमक्खी में भी तूने, क्या यंत्र हैं लगाए,
मधु सबके मन को भाए, लाला हो चाहे लाली।।
दुनियाँ बनाने वाले……..

जुगनू की दुम में तूने, क्या बल्ब है लगाया,
बरसात की निशा में, जंगल है जगमगाया,
बिजली की चमक कैसी, घन की घटा है काली।।
दुनियाँ बनाने वाले…,….

बरसात के दिनों में, लैंटर टपकते देखा,
वैये के घोंसले में, पाई ना जल की रेखा,
क्या तकनीकी सिखाई, तूने ओ जग के माली ।।
दुनियाँ बनाने वाले………

मोरों के पंख देखो, क्या विचित्र चित्रकारी,
कोयल बनायी काली, आवाज प्यारी-प्यारी,
पंछी चकोर के क्या, आँखों में कशिश डाली।।
दुनियाँ बनाने वाले………

बच्चे किसी के दर्जन, टुकड़ों के भी हैं
लाले, संतान बिन किसी के, घर में लगे हैं
ताले, जीवों के कर्म फल की, तेरे हाथ में है ताली।।
दुनियाँ बनाने वाले……..

माता पिता विधाता, बन्धु सखा न भ्राता,
महिमा का ‘पथिक’ तेरी, किसी को ना भेद पाता,
तेरे दर पे आए दाता, लेकर के झोली खाली।।
दुनियाँ बनाने वाले………..