धर्म वैदिक आर्य नाम एक ईश्वर की करें

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धर्म वैदिक आर्य नाम एक ईश्वर की करें

धर्म वैदिक आर्य नाम
एक ईश्वर की करें
उपासना रोज सवेरे-शाम ।।
चराचर जगत् का स्वामी,
जगत् का पिता एक है,
सबके शुभ-अशुभ कर्म,
जिसे पूरा विवेक है।

पृथ्वी-आकाश व तारे,
सूर्य-चन्द्र बनाए,
वेद के अंदर प्रभु के,
असंख्य नाम बताए ।
मुख्य नाम है ओम् प्रभु
का जो है आनन्द धाम ।।

विश्व के सर्वेश्वर का
एक ही संविधान है,
अग्नि वायु आदित्य
अंगिरा को दिया ज्ञान है।

ज्ञान ऋग्वेद के अंदर
यजु में कर्म प्रधान है,
उपासना सामवेद में
अथर्व में विज्ञान है।
सबसे पहले वेद की
रचना माने जगत् तमाम ।।

हिमालय से विंध्याचल
अटक ब्रह्मपुत्र बताया,
जो इसका मध्यभाग
है आर्यावर्त कहाया।

वेद अनुकूल जीवन जो
करता श्रेष्ठ कार्य है,
वही ईश्वर का पुत्र है,
कहाता वही आर्य है।
आर्य कहाते थे अपने को,
श्री राम घनश्याम ।।

महाभारत की फूट से
भाग्य भारत का फूटा
पाखंड और अन्धविश्वास में,
धर्म से नाता टूटा।

रक्षक सोमनाथ है निकला
विश्वास ये झूठा महमूद
गजनवी ने तभी मंदिरों को लूटा।
अपनी गलती समझा नरेश
पाखंड का यह परिणाम ।।