धन्य है तुमको ऐ ऋषि
तूने हमें जगा दिया।
सो-सो के लुट रहे थे हम
तूने हमें बचा लिया।
तेरे दीवाने जिस घड़ी,
दक्षिण दिशा को चल दिए।
हैरत में लोग रह गये,
दुनियाँ का दिल हिला दिया-धन्य है….।
अन्धों को आंखें मिल गई,
मुर्दों में जान आगई।
जादू-सा क्या चला दिया,
अमृत-सा क्या पिला
दिया-धन्य है….।
तुझ में कुछ ऐसी बात थी,
कि तेरी बात पर ऐ ऋषि।
लाखों शहीद हो गये, लाखों ने
सिर कटा दिया-धन्य है….।
श्रद्धा से श्रद्धानन्द ने,
सीने पै खाई गोलियाँ।
हंस-हंस के हंसराज ने,
तन मन व धन लुटा दिया-धन्य है….।
अपने लहू से लेखराम,
तेरी कहानी लिख गया।
तूने ही लाला लाजपत,
शेरे बब्बर बना दिया-धन्य है….।










