देखा न कोई दूजा, ऋषिवर महान जैसा ।
देखा न कोई दूजा,
ऋषिवर महान जैसा ।
इक ओर सारी दुनिया,
इक ओर वो अकेला ।।
कोई संग में नहीं था,
चेली न कोई चेला दुनियां
के हर सितम को मर्दानगी
से झेला हरदम अड़ा रहा
वो सुदृढ़ चट्टान जैसा…..।
देखा किसी का दुःख तो
ऋषिवर की आंख रोई जग
के लिए ऋषि ने रातों की
नींद खोई देखे अनेक त्यागी
ऋषिराज सान कोई दिल था
विशाल इतना है आसमान जैसा….. ।।
हे आर्यो ! समाधि मेरी न तुम
बनाना मेरे तन की राख लेकर
खेतों में जा गिराना वेदों के
पथ पे चलना संसार को
चलाना बन जाए “श्याम”
जीवन ऋषिवर महान जैसा …।।










